दड़बे की मुर्गी
दड़बे की मुर्गी दड़बे की मुर्गी एक शिष्य अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला, ” लोगों को खुश रहने के लिए क्या चाहिए?” “तुम्हे क्या लगता है?”, गुरु ने शिष्य से खुद इसका उत्तर देने के लिए कहा. शिष्य एक क्षण के लिए सोचने लगा और बोला, “मुझे लगता है कि अगर किसी की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हो रही हों… खाना-पीना मिल जाए …रहने के लिए जगह हो…एक अच्छी सी नौकरी या कोई काम हो… सुरक्षा हो…तो वह खुश रहेगा.” यह सुनकर गुरु कुछ नहीं बोले और शिष्य को अपने पीछे आने का इशारा करते हुए चलने लगे. वह एक दरवाजे के पास जाकर रुके और बोले, “इस दरवाजे को खोलो…” शिष्य ने दरवाजा खोला, सामने मुर्गी का दड़बा था. वहां मुर्गियों और चूजों का ढेर लगा हुआ था… वे सभी बड़े-बड़े पिंजड़ों में कैद थे…. “आप मुझे ये क्यों दिखा रहे हैं.” शिष्य ने आश्चर्य से पूछा. इस पर गुरु शिष्य से ही प्रश्न-उत्तर करने लगे. “क्या इन मुर्गियों को खाना मिलता है?'” “हाँ.” “क्या इनके पास रहने को घर है?” “हाँ… कह सकते हैं.” “क्या ये यहाँ कुत्ते-बिल्लियों से सुरक्षित हैं?” “हम्म” “क्या उनक पास कोई काम है?” “हाँ, अंडा देना.” “क्या वे खुश हैं?” ...